Class 12 NCERT Solutions Hindi Aroho chapter Bhaktin by Mahadevi Varma
Class 12 NCERT Solutions
Hindi Aroho chapter
Bhaktin by Mahadevi Varma
1. आलो आँधारि की नायिका और लेखिका बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में आप क्या समानता देखते हैं?
3. भक्तिन की बेटी के मामले में जिस तरह का फ़ैसला पंचायत ने सुनाया, वह आज भी कोई हैरतअंगेज़ बात नहीं है। अखबारों या टी. वी. समाचारों में आनेवाली किसी एेसी ही घटना को भक्तिन के उस प्रसंग के साथ रखकर उस पर चर्चा करें।
4. पाँच वर्ष की वय में ब्याही जानेवाली लड़कियों में सिर्फ़ भक्तिन नहीं है, बल्कि आज भी हज़ारों अभागिनियाँ हैं। बाल-विवाह और उम्र के अनमेलपन वाले विवाह की अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर दोस्तों के साथ परिचर्चा करें।
5. महादेवी जी इस पाठ में हिरनी सोना, कुत्ता बसंत, बिल्ली गोधूलि आदि के माध्यम से पशु-पक्षी को मानवीय संवेदना से उकेरने वाली लेखिका के रूप में उभरती हैं। उन्होंने अपने घर में और भी कई पशु-पक्षी पाल रखे थे तथा उन पर रेखाचित्र भी लिखे हैं। शिक्षक की सहायता से उन्हें ढूँढ़कर पढ़ें। जो मेरा परिवार नाम से प्रकाशित है।
1. नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोगों के उदाहरणों को ध्यान से पढ़िए और इनकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-
(क) पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले
(ख) खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी
(ग) अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण
2. ‘बहनोई’ शब्द ‘बहन (स्त्री.)+ओई’ से बना है। इस शब्द में हिंदी भाषा की एक अनन्य विशेषता प्रकट हुई है। पुंलिंग शब्दों में कुछ स्त्री-प्रत्यय जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द बनने की एक समान प्रक्रिया कई भाषाओं में दिखती है, पर स्त्रीलिंग शब्द में कुछ पुं. प्रत्यय जोड़कर पुंलिंग शब्द बनाने की घटना प्रायः अन्य भाषाओं में दिखलाई नहीं पड़ती। यहाँ पुं. प्रत्यय ‘ओई’ हिंदी की अपनी विशेषता है। एेसे कुछ और शब्द और उनमें लगे पुं. प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।
3. पाठ में आए लोकभाषा के इन संवादों को समझ कर इन्हें खड़ी बोली हिंदी में ढाल कर प्रस्तुत कीजिए।
(क) ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।
(ख) हमारे मालकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं। अब हमहूँ पढ़ै लागब तो घर-गिरिस्ती कउन देखी-सुनी।
(ग) ऊ बिचरिअउ तौ रात-दिन काम माँ झुकी रहती हैं, अउर तुम पचै घूमती-फिरती हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
(घ) तब ऊ कुच्छौ करिहैं-धरिहैं ना–बस गली-गली गाउत-बजाउत फिरिहैं।
(ङ) तुम पचै का का बताईयहै पचास बरिस से संग रहित है।
(च) हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूँँजब और राज करब, समुझे रहौ।
4. भक्तिन पाठ में पहली कन्या के दो संस्करण जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इनमें किन तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है? इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि एेसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?
– अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।
– घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज़्यादा फ़ाउल मारा तो रेड कार्ड दिखा के हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूँगा।
– जानी टेंसन नई लेने का वो जिस स्कूल में पढ़ता है अपुन उसका हैडमास्टर है।
(क) **पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले**:
- अर्थ: इस वाक्य में 'कन्या' का मतलब बेटी से है और 'संस्करण' का मतलब है पुनरावृत्ति या प्रतिलिपि। इस वाक्य का तात्पर्य है कि पहली बेटी के बाद दो और बेटियाँ पैदा हुईं।
- छवि: एक पुस्तक के विभिन्न संस्करणों की तरह, एक ही प्रकार की तीन बेटियाँ होने का चित्रण किया गया है।
(ख) **खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी**:
- अर्थ: इस वाक्य में 'खोटे सिक्के' का मतलब बेकार या अविश्वसनीय चीजों से है और 'टकसाल' का मतलब है जहाँ सिक्के बनते हैं। यहाँ पत्नी का तात्पर्य है जो बहुत सी बेकार या अविश्वसनीय चीजें पैदा करती है।
- छवि: एक ऐसी पत्नी की छवि जो लगातार समस्याएं या अविश्वसनीय चीजें पैदा करती है।
(ग) **अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण**:
- अर्थ: 'अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ' का मतलब है स्पष्ट न दिखाई देने वाले या समझ न आने वाले बार-बार होने वाले कार्य। 'स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण' का मतलब है स्पष्ट रूप से दया या संवेदना दिखाना।
- छवि: अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ एक धुंधली छवि देती हैं, जबकि स्पष्ट सहानुभूति एक स्पष्ट और सजीव तस्वीर पेश करती है।
### 2. पुंलिंग शब्दों में लगे पुं. प्रत्यय
हिंदी में कुछ अन्य उदाहरण:
- **ननदोई**: ननद (स्त्री) + ओई = ननदोई (पति का भाई)
- **ससुर**: सास (स्त्री) + उर = ससुर (पति का पिता)
- **साली-साढ़ू**: साली (स्त्री) + साढ़ू = साली का पति
इन उदाहरणों में, हिंदी की विशेषता यह है कि स्त्रीलिंग शब्दों में पुंलिंग प्रत्यय जोड़कर नए पुंलिंग शब्द बनाए जाते हैं।
### 3. लोकभाषा के संवादों का खड़ी बोली हिंदी में अनुवाद
(क) ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।
- यह कौन सी बड़ी बात है। रोटी बनाना जानती है, दाल पका लेती है, साग-भाजी छौंक सकती है, और क्या बचा?
(ख) हमारे मालकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं। अब हमहूँ पढ़ै लागब तो घर-गिरिस्ती कउन देखी-सुनी।
- हमारी मालकिन तो रात-दिन किताबों में गड़ी रहती हैं। अब अगर मैं भी पढ़ने लगूं तो घर-गृहस्थी कौन देखेगा?
(ग) ऊ बिचरिअउ तौ रात-दिन काम माँ झुकी रहती हैं, अउर तुम पचै घूमती-फिरती हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
- वह बेचारी तो रात-दिन काम में लगी रहती है, और तुम लोग घूमती-फिरती हो, चलो थोड़ी मदद कर दो।
(घ) तब ऊ कुच्छौ करिहैं-धरिहैं ना–बस गली-गली गाउत-बजाउत फिरिहैं।
- तब वह कुछ नहीं करेंगे–सिर्फ गली-गली घूमते-बजाते फिरेंगे।
(ङ) तुम पचै का का बताईयहै पचास बरिस से संग रहित है।
- आप लोग क्या-क्या बताएंगे, पचास साल से साथ रहते हैं।
(च) हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूँँजब और राज करब, समुझे रहौ।
- हम कुत्ता-बिल्ली नहीं हैं, हमारा मन पसंद आया तो हम दूसरी जगह जाएंगे नहीं तो तुम्हारे ऊपर ही राज करेंगे, समझे?
### 4. भाषाई प्रयोग और उनकी चर्चा
नीचे दिए गए वाक्यों में तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है: अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण, तकनीकी शब्दावली और आधुनिक मुहावरों का उपयोग।
उदाहरण:
- **अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण**: "मैंने आज एक नया प्रोजेक्ट स्टार्ट किया है।"
- **तकनीकी शब्दावली**: "हमारे वेब डेवलपमेंट टीम ने नया एल्गोरिथ्म तैयार किया है।"
- **आधुनिक मुहावरों का उपयोग**: "इस इवेंट ने तो चार चांद लगा दिए।"
**नई शब्दावली का उपयोग करके वाक्य**:
- "हमारी मीटिंग का एजेंडा काफी क्रूशियल था।"
- "उसकी प्रेजेंटेशन ने पूरे ऑडियंस को इंप्रेस कर दिया।"
- "नई टेक्नोलॉजी के चलते हमारा वर्कफ्लो काफी स्मूथ हो गया है।"
इन प्रयोगों पर चर्चा करते हुए हम देख सकते हैं कि भाषा में नई शब्दावलियों का सम्मिलन इसे अधिक समृद्ध और आधुनिक बनाता है। इससे संप्रेषण की शक्ति बढ़ती है और यह नई पीढ़ी के लिए भाषा को अधिक प्रासंगिक बनाता है।
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